{"product_id":"9788170284918","title":"Hindustani Gazlen","description":"गजल क इतहस म जन क जररत म महसस नह करत। सहतय क हर वध अपन बत और उस कहन क ढब स, ससकर स फरन पहचन जत ह। गजल क त यह खसयत ह। आप उरद जन य न जन, पर गजल क जन भ लत ह और समझ भ लत ह। जब 13व सद म, आज स सत स सल पहल हनद खड बल क बब आदम अमर खसर न खड बल हनद क गजल लख जब यर दख नयन भर दल क गई चत उतर, ऐस नह कई अजब रख उस समझय कर। जब आख स ओझल भय, तडपन लग मर जय, हकक इलह कय कय, आस चल भर लय कर। त त हमर यर ह, तझ पर हमर पयर ह, तझ दसत बसयर ह इक शब मल तम आय कर। जन तलब तर कर दगर तलब कसक कर, तर ह चत दल धर इक दन मल तम आय कर। त गजल क इतहस जनन क जररत नह थ। अमर खसर क सत स सल बद भ बसव सद क बतत बरस म जब दषयत न गजल लख कह त तय थ चरग हरक घर क लए, कह चरग मययसर नह शहर क लए। तब भ इतहस क जनन क जररत नह पड। ज बत कह गय, वह सध लग क दल-दमग तक पहच गय। और जब 'अदम' गडव कहत ह गजल क ल चल अब गव क दलकश नजर म, मसलसल फन क डएम घटत ह इन अदब इदर म। तब भ इस कथन क समझन क लए इतहस क तकलफ दन क जररत नह पडत। गजल एकमतर ऐस वध हज कस खस भष क बधन म बधन स इकर करत ह। इतहस क गजल क जररत ह, गजल क इतहस क नह। इसलए यह सकलन अभ अधर ह। गजल क तफन रचनतमक बढ क सभल सकन समभव नह ह। शष-अशष अगल सकलन म। - कमलशवर","brand":"Rajpal \u0026 Sons","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":48583255228657,"sku":"9788170284918","price":19.99,"currency_code":"USD","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0674\/5433\/7265\/files\/9788170284918_p0.jpg?v=1787144795","url":"https:\/\/shop.barnesandnoble.com\/products\/9788170284918","provider":"Barnes \u0026 Noble","version":"1.0","type":"link"}